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आधुनिक हिन्दी गद्य की विशिष्ट पहचान हैं कृष्णा सोबतीः प्रो. अशुतोष

संपादकीय टीम 6 फ़रवरी 2026 को 09:08 am बजे
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हमारा मोर्चा, प्रतिनिधि

प्रयागराजः हिन्दी विभाग, प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय में संपादक हितेश कुमार सिंह के संपादन में प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘प्रयागपथ’ के कृष्णा सोबती विशेषांक पर एक विस्तृत परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी साहित्य की महत्त्वपूर्ण लेखिका कृष्णा सोबती के रचनात्मक अवदान तथा विशेषांक की विषय-वस्तु पर गंभीर विमर्श करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि कृष्णा सोबती आधुनिक हिन्दी गद्य की विशिष्ट पहचान हैं। उनकी रचनाओं में स्त्री-अनुभव, सामाजिक यथार्थ और भाषा की सृजनात्मक ऊर्जा का विलक्षण समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ‘मित्रो मरजानी’, ‘डार से बिछुड़ी’, ‘ज़िन्दगीनामा’ जैसी रचनाएँ हिन्दी साहित्य को नई संवेदना प्रदान करती हैं। कृष्णा सोबती का लेखन केवल साहित्यिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सामाजिक चेतना को भी जाग्रत करता है।

इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर अलका मिश्रा ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘प्रयागपथ’ का यह विशेषांक शोध छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। इसमें कृष्णा सोबती के साहित्य को विभिन्न आलोचनात्मक दृष्टिकोणों से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे सोबती-साहित्य को समकालीन सामाजिक और स्त्री-विमर्श के संदर्भ में नए ढंग से पढ़ें और उस पर शोध-कार्य करें।

विशेषांक के संपादक हितेश कुमार सिंह ने पत्रिका की संपादन-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अंक में कृष्णा सोबती के साहित्यिक योगदान को बहुआयामी रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इसमें उनके जीवन, रचनात्मक विकास, भाषा-शैली तथा वैचारिक दृष्टि पर आधारित आलेख सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि इस विशेषांक का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रामाणिक सामग्री उपलब्ध कराना है।

परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कृष्णा सोबती को हिन्दी साहित्य में स्त्री-स्वर की सशक्त प्रतिनिधि बताया तथा उनके लेखन को भारतीय समाज के अंतर्विरोधों को उजागर करने वाला साहित्य कहा। कार्यक्रम में उपस्थित शोध छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और विशेषांक को अध्ययन की दृष्टि से उपयोगी बताया।

कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के शिक्षक द्वारा किया गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। परिचर्चा में हिन्दी विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम साहित्यिक अध्ययन की दृष्टि से अत्यंत सार्थक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस अवसर पर दीनदयाल शोध पीठ के निदेशक प्रो आशुतोष कुमार सिंह, सहायक आचार्य डॉ अलका मिश्रा, डॉ बब्लू यादव एवं शोधार्थी अमित कुमार यादव, मनीष यादव, प्रियंका त्रिपाठी, सोना देवी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।