तू ही दुर्गा तू ही मां काली, तू हीअम्बा भवानी, योग माया...

तू ही दुर्गा तू ही मां काली,तू ही,.अम्बा भवानी, योग माया........
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
मार्कंडेय पुराण के सावर्णिक मन्वंतर में महाशक्ति के आविर्भाव की कथा रूपक के जरिए कही गई है।
दैत्यराज महिषासुर के देवलोक विजय और इन्द्रानी पर अधिकार कर लेनें पर स्वर्ग से भागे हुए सारे देवता एक जगह इकट्ठे हुए। देवताओं की समस्या सुनकर शंकर ने रूद्र रूप धारण करके भृकुटी टेढ़ी कर लिए।ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र आदि देवताओं ने भी अपने तेज को प्रकट किया। तब विष्णु के शरीर से महान तेज तत्व निकला । सारे देवताओं का तेज उसमें समाहित हो गया। इस तरह उस तेज से महाशक्ति का निर्माण हुआ।
मार्कंडेय ऋषि ने इस स्वरूप का वर्णन इस प्रकार से किया है__
अतीव तेजस कूटं ज्वलंतमिव पर्वतम्।
ददृशुस्ते सुरास्तत्र,ज्वालाव्याप्तदिगन्तरम्।।
अतुलं तत्र तत्तेज:, सर्वदेवशरीरजम्।
एकस्थं तदभून्नारी,व्याप्तलोकत्रयं त्विषा।।
सत्व तेज का यह समन्वित पुंज जलते हुए पर्वत जैसा जान पड़ा
उसकी ज्वालाएं सभी दिशाओं में फैल गई।वह तेज अतुलनीय था अवर्णनीय था। वह नारी रूप में बदल गया और उसके प्रकाश से तीनों लोक जगमगाने लगा।
'देव्यथर्वशीर्ष' में इस ब्रह्मांड व्यापिनी महाशक्ति के प्रकट होने का वर्णन है।
जब देवताओं ने महाशक्ति से पूछा ,महादेवि,आप कौन हैं?
महादेवी ने कहा -- मै ब्रह्मस्वरूपा हूं। प्रकृति पुरुष रूप का यह सारा जगत मुझसे ही है। सत् असत्य संसार मुझसे ही बना है।मैं ही आनन्द,अनानन्द रूपा हूं।विज्ञान और अविज्ञान मैं ही हूं। पंचभूत,अपंचभूत भी मैं ही हूं। विद्या,अविद्या,वेद,अवेद,अजा ,अनजा मैं हूं।
यज्ञ में होम करने वाला और हविष्य को प्राप्त करनें वाला भी मैं ही हूं।
ठीक उसी समय से देवताओं ने इस महाशक्ति को दुर्गा,काली, सरस्वती,लक्ष्मी, स्कन्द माता, अदिति, कल्याणकारी मां का स्वरूप मानकर इनकी आराधना की।
जब जब देवताओं ने अपने बल पौरुष पर अभिमान किया मां अम्बा ने उसे चकनाचूर कर दिया। और उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके पराक्रम की शक्ति मां अम्बा ही हैं।
महाशक्ति, मातृशक्ति, आदिशक्ति, की उपासना हमारी हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक चेतना और आस्था का मूल तत्व है।हम जानते थे कि ब्रह्म को व्यक्त होंने के लिए शक्ति का सहारा चाहिए ही चाहिए।
शक्ति ब्रह्म का ही कल्याणकारी, सृष्टिकारी प्रकट स्वरूप है। शक्ति के अभाव में शिव,शव के समान है।
इसका साक्षात अनुभव जगद्गुरु शंकराचार्य जी को हुआ।तभी उन्होंने मां अम्बा की आराधना में अनेक स्त्रोतों की रचना कर डाली।
नवरात्रि पर्व यों तो वर्ष में चार बार आता है, लेकिन उनमें से शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र गृहस्थों के लिए ज्यादा पूजनीय माना जाता है।
इन नवरात्रों में हम नौ महाशक्तियों की आराधना, वन्दना करते हैं।
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघंटेति,कूष्मांडेति चतुर्थकम्।।
पंचमम् स्कंधमातेति,षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमम् कालरात्रि महागौरीति चाष्टकम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।।
भारतीय चिंतन और दर्शन में शक्ति का नारी रूप ही उपासना का परम लक्ष्य है।
पुरूष शक्ति में तामस,दम्भ, हिंसा जैसे तमाम दोष आसानी से आ जाते हैं। लेकिन नारी शक्ति का स्वरूप अपनी प्रकृति से ही वात्सल्यमय,शान्त,निर्मल,कोमल, और भव्य माना जाता है।नारी धात्री है,धारिणी है,पालिका है। वात्सल्यमयी है।वह हर हाल में अपने पुत्रों का पालन करती है।
भारतीय चिंतन कहता है----कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति।
हम हजारों गलतियां करते हैं, मां के बरतनें के बाद भी करते हैं।
हम मोह,माया,वासना वैभव के पीछे भागते रहते हैं,गिरते हैं, तो सबसे पहले मां ही याद आती है।
मां क्षमाशील है हमारी हर ग़लती को माफ़ कर देती है।
इसीलिए हमारे मनीषियों ने सबसे पहले मां की आराधना का विधान रखा है।
मातृदेवोभव,पितृदेवोभव, आचार्यदेवोभव, का क्रम रखा गया।
हमारे मनीषियों, कवियों ने भी मातृशक्ति का महत्व मानते हुए व्यावहारिक रूप से समाज के सामने रखा।
बंकिम चन्द्र जी ने दशप्रहरणधारिणी,दुर्गा को सुजलाम,सुजलाम धरती के रूप में देखा। बंगाल की खाड़ी से उठा वन्देमातरम् का जयघोष पंजाब की सरहदों तक गूंजा।
अफसोस की बात यह है कि आज यह गान सियासती दांव-पेंच गिरफ्त में घुटनें लगा है।
हम आदिशक्ति, नारीशक्ति की आराधना तो कर ले रहें हैं किन्तु व्यावहारिक धरातल पर उसका पालन नहीं कर रहें हैं।
हमारे देश में कन्याओं, स्त्रियों की जो दुर्दशा हो रही है,उसे आदिशक्ति देखकर अपनी शक्ति पर शर्मिंदा हो रही होंगी।
आइये इस नवरात्रि हम सभी मिलकर यह संकल्प लें आदिशक्ति, नारीशक्ति की आराधना व्यावहारिक जगत में भी करते हुए मां अम्बा को प्रसन्न करेंगे।
प्रत्येक नारीशक्ति का सम्मान करते हुए अपने देश की सं
स्कृति को सुरक्षित करेंगे।
हम मां अम्बा से प्रार्थना करेंगे कि देश दुनिया (ईरान, इसराइल, अमेरिका) में शान्ति और सौहार्द दें।
चैत्र नवरात्र आप सबके जीवन मंगलकारी हो।
शालू शुक्ला। लखनऊ